Reality of ISKCON ं

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ISKCON .......(International
Society of Krishna
Consiousness )
एक अमेरिकन संस्था है, जिसने अनेक देशों में
कृष्ण भगवान् के
मंदिर बनाए हुए है और ये मन्दिर
अमेरिका की कमाई
के सबसे बड़े साधन हैं; क्योंकि इन मंदिरों
पर इनकम टैक्स
भी नहीं है । ये
संस्था लोगों की अंधभक्ति का फ़ायदा उठाकर
खरबों
डॉलर इन मंदिरों में आनेवाले चढ़ावे के
माध्यम से
अमेरिका ट्रान्सफर कर देती है और
दुर्भाग्य से
इस लुटेरी ISKCON संस्था के सबसे
ज्यादा मंदिर
भारत में है। आपको जानकर आश्चर्य
होगा कि अमेरिका की कोलगेट
कंपनी एक साल में जितना शुद्ध लाभ अमेरिका भेजती है उससे 3 गुना ज्यादा अकेले
बैंगलोर का ISKCON मंदिर भारत का पैसा अमेरिका भेज
देता है और बैंगलोर से भी बड़ा मंदिर
दिल्ली में है, और दिल्लीसे
भी बड़ा मंदिर मुंबई में है और उससे भी बड़ा मंदिर मथुरा में हो गया है भगवान्
कृष्ण
की छाती पर !
और वहाँ धुआँधार चढ़ावा आता है । .
कृपया ISKCON और इस तरह की सभी लुटेरी संस्थाओँ का प्रबल विरोध करके देश को लुटने से
बचाने में अपना सहयोग
दें।
मन्दिरो में दान देने वाले हिन्दू भाई-बहन सुप्रीम कोर्ट की ये न्यूज़ पढ़ें....
आप सोचते हैं कि मन्दिरों में किया हुआ दान, पैसा/
सोना .....इत्यादि हिन्दू धर्म के उत्थान के लिए काम आ रहा है और आपको पुण्य मिल रहा है तो आप
निश्चित ही बड़े भोले... हैं।

कर्नाटक सरकार के मन्दिर एवं पर्यटन
विभाग (राजस्व)
द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार 1997 से 2002
तक पाँच साल में कर्नाटक Congress सरकार को राज्य में
स्थित मन्दिरों से
“सिर्फ़ चढ़ावे में” 391 करोड़ की रकम
प्राप्त हुई, जिसे निम्नलिखित मदों में खर्च किया गया-
1) मुस्लिम मदरसा उत्थान एवं हज मक्का मदिना सब्सिडी, विमान टिकट –
180 करोड़
(यानी 46%)
2) इसाई चर्च को अनुदान (To
convert poor Hindus
into Christian) – 44 करोड़
(यानी 11.2%)
3) मन्दिर खर्च एवं रखरखाव – 84
करोड़
(यानी 21.4%)
4) अन्य – 83 करोड़ (यानी 21.2%)
कुल 391 करोड!!!!!
ये तो सिर्फ एक राज्य का हिसाब है....
हर रोज हजारों करोड़ों पैसा/
सोना दान ...
सच हिन्दुओं
को ही पता नहीं चलेगा...
भगवद् गीता में भगवान् ने बताया है कि दान देते
वक्त अपनी विवेक बुद्धि से सत्पात्र को दान दें..ताकि वह
समाज/देश की भलाई में इस्तेमाल हो, नहीं तो दानदाता पाप
का ही भागीदार है....

Mayank Singh

Developer

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