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स्वामी विवेकानंद से पूछा गया कि आपको हिंदू होने का गर्व क्यों है? उनका उत्तर था- मुझे बचपन से गीता सुनाई गई. जीवन में जब भी भटकाव महसूस हुआ,गीता के ज्ञान ने राह दिखा दी. चार वेदों को देखता हूं तो गर्व होता है कि हमारे पूर्वज विज्ञान, योग, चिकित्सा, संगीत, शस्त्र-शास्त्र के ज्ञान में हमसे कहीं आगे थे.
पुराणों-उपनिषदों से जाना कि मनुष्य को संकट के बीच से राह निकालने का हुनर आना चाहिए. संकटकाल में अनुभव ही काम आता है. ज्ञान के इस सागर को देखकर हिंदू होने का गर्व तो होगा ही.
पर क्या नई पीढ़ी को विवेकानंद जैसा गर्व हो रहा है? शायद नहीं. क्यों कट रही है नई पीढ़ी धर्म से?
बच्चे के साथ हनुमान मंदिर गए. उसने पूछा भगवान को सिंदूर क्यों लगाया गया? आप उत्तर जानते नहीं थे. इसलिए अपनी झेंप मिटाने के लिए बच्चे को झिड़क दिया-सवाल नहीं पूछते, बस भगवान को प्रणाम करो. उस बच्चे से आप धर्म से जुड़े रहने की आशा कैसे रखेंगे?
कड़ियां टूट रही हैं. बात कड़वी है, पर सोचकर देखिए क्या सच नहीं है? खैर, बीती ताहि बिसारिए आगे की सुधि लेहि. अनगिनत ग्रथों में समाए सनातन के ज्ञान को आज से भी थोड़ा-थोड़ा करके लेना शुरू कर दें, तो बात बनने लगेगी.
इसीलिए प्रभु शरणम् बनाया गया है. हिंदू अपनी सांस्कृतिक-आध्यात्मिक विरासत से जुड़े रहें इसकी एक कोशिश हुई है.समय के अभाव में ग्रंथों को विस्तार से पढ़ना संभव नहीं किंतु थोड़ा-थोड़ा करके मिलने लगे तो असंभव भी नहीं.
एप्प में वेद-पुराण, गीता, रामायण, मंत्र, ज्योतिष जैसे हिंदू धर्म के धरोहरों का सार छोटे-छोटे अंशों में दिया जा रहा है. एक बार एप्प को देखिए तो सही, आनंद आएगा.
यदि एप्प जरा भी उपयोगी लगा हो तो कृपया इसका लिंक मित्रों से शेयर करें.हिंदुत्व का यह मिशन रूकना नहीं चाहिए.
प्रभु शरणम् (prabhu sharnam) एंड्रॉयड एप्प लिंक:
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.prabhusharnam.prabhutkripa


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